Tuesday, August 1, 2017

-: मेरा देश महान:-

-: मेरा देश महान:-
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                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
सुबह सो कर उठे खाट से खबर मिले है भारी
गैर डकैती बलात्कार कर अबला चार मारी
आफिस के एक चपरासी ने घोटाला किया भरी
रेल गाड़ी से बस टकरा गई मर गई बीस सवारी
हा- हाकार मचा चारो ओर है मेरा देश महान II1II
                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II

भाई का दुश्मन भाई है यहाँ ये कैसी नादानी
कही गधे पीते है बीयर कही नहीं है पानी
सन्तरी-मंत्री नेता अफसर कर रहे सब मनमानी
दूध की जगह यह बच्चो को मिलता है अब पानी
चीनी,मिर्च, मसाला, तेल अब नहीं मिले आसान II2II

                                    देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
खालिस्तान की मांग करी पंजाब हो गया खली
बोरोलैंड कभी झारखंड की मांग उठे यहाँ भरी
अगनि,गोली कांड कही पर बम्ब फटे यहाँ भरी
देश की जानती नेताओ ने महगाई  से मारी
हे भारत माँ के देश द्रोही अब अपनी छोड़ो आन II3II
                                                                 देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
जातिवाद कभी आरक्षण पर होती रोज लड़ाई
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों की होती रोज तुडाई
मानवता को छोड़ यहाँ मरते आपस में भाई
गुंडे ओर बेईमान यहाँ करते है खूब कमाई
गरीब,शरीफ ,कमजोर आदमी कहलाता बेईमान II4II
                         देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
जनसँख्या और बेरोजगारी रोजाना बढ़ जाती
पिलैग,पोलिओ, ड्राप्सी, एड्स की बीमारी यहाँ पाती
सरकार देश की जनता को करके घोटाले खाती 
भूकंप,अंधी,बाढ़ यहाँ हर वर्ष तबहा कर जाती
आज यहाँ पर सस्ती मिलती है लोगो की जान II5II  
                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II

आतंकवाद हर जगह यहाँ रोजाना बढता जाता
निर्दोषों को गोली से सरेआम उड़ाया जाता
भारत में अब औरत को सरेआम जलाया जाता
रिश्वत लेकर दोषी को सरेआम बचाया जाता
वी. पी.सिंह कहें भाईओ तुम क्यों बने हुए नादान II6II 

देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II


                                                            वी.पी. सिंह

----- कभी जमीं कभी आसमां ---




------ कभी जमीं कभी आसमां --------

कभी जमीं कभी आसमां समझ में नहीं आता . 
इस दिल का ठिकाना भी समझ में नहीं आता .
मेरी आँखें उसकी यादों के चिराग तो नहीं .
क्यूँ आये बस वो ही नज़ीर समझ में नहीं आता .
चाहे अनचाहे मै उसे याद किया करता हूँ 
ये लत है या आदत समझ में नहीं आता .
कमबखत आशिक़ी ने जीना हराम कर दिया. 
उसे भूलू या अपनी जान दूँ समझ में नहीं आता .
इस तरफ मेरा घर है उस तरफ उसका घर 
इधर जाऊं या उधर समझ में नहीं आता .
पागल सा बन के रह गया कुछ सोच सोचकर. 
पहले हँसू या रोऊँ समझ में नहीं आता .
लिफाफा फट चूका मजमून भी काफी पुराना हो गया 
उसे दूँ यह ख़त या जला दूँ समझ में नहीं आता .
उसकी वफ़ा पर अब मुझे शक़ होने लगा है. 
उसे यार कहूं या गद्दार समझ में नहीं आता .
रक़ीबों के साथ बैठे हैं अजीज-ओ-मोहतरिम 
कैसे करूँ सलाम समझ में नहीं आता .
समझले दिल को मस्तग़न कुछ और न समझ. 
फिर खुद समझ जायेगा जो समझ में नहीं आता .

V.P.Singh

-----:आँख को जाम लिखो:-------

----------:आँख को जाम लिखो:----------

आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बरसात लिखो
जिस से नाराज़ हो उस शख्स की हर बात लिखो
जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाक़ी है
उसी अनजान शनासा की मुलाक़ात लिखो
जिस्म मस्जिद की तरह,आँखें नमाज़ो न जैसी
जब गुनाहो में इबादत की,वो दिन -रात लिखो
इस कहानी का तो अंजाम वही है जो था
तुम जो चाहो तो मुहब्बत की शुरुवात लिखो
जब भी देखो उसे अपनी नज़र से देखो

कोई कुछ भी कहे तुम अपने खयालात लिखो

---- अपनी खुशियां कम लिखना---

---- अपनी खुशियां कम लिखना---

अपनी खुशियां कम लिखना,
औरों के भी गम लिखना। 
हँसते अधरों के पीछे,
कितनी ऑंखें नम लिखना।
किसका अब विश्वास करें हम,
झूठी हुई कसम लिखना। 
महलों में तो रोज मौज हैं,
कुटियों के मातम लिखना। 
तंत्र-मंत्र में डूबे हैं सब,
लोकतंत्र बेदम लिखना। 
नेताओं के पेट बढे हैं,
सब कुछ करें हज़म लिखना। 
मतलब हो तो गैरों की भी,
भरते लोग चिलम लिखना। 
अब तक पूज्य बने थे जो,
वे भी हुए अधम लिखना। 
भर दे सबके घावों को,
ऐसा कोई मरहम लिखना।
झूठों के गढ़ पर सच के,
फहरें अब परचम लिखना।
अपनी खुशियां कम लिखना,
औरों के भी गम लिखना। 

-----:एक निशानी हूँ मैं:-----

-----:एक निशानी हूँ मैं:-----
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 अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दिया तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
 रोक पाये न जिसको ये सारी दुनिया,
वो! एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
झुलस कर मिटने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
 इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन" हूँ मैं 
जो समझ गये उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
दिल की आँख से देखोगे तो खुश पाओगे मुझे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,…..
"अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दिया तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं" ,
                                    वी. पी. सिंह

--:दर्दे-दिल:--

--:दर्दे-दिल:--
अब दिल कि तरफ दर्द कि यादगार बहुत है I
इस दुनिया में जख्मो कि तलबगार बहुत है I
अब टूट रहा है  मेरी  हस्ती  का  तसुब्बुर ,
इस  वक्त  मुझे  तुमसे सरोकार  बहुत  है I
हर सांस उखड जाने कि कोशिश में परेशां I
मेरे सीने में कोई है जो गिरफ्तार बहुत है I
पानी से उलझते हुए इस इन्शान का शोर I
उस ओर भी होगा मगर इस ओर बहुत है I
मिट्टी कि यह दीवार कही टूट न  जाये ,
रोको ! कि मेरे खून कि रफ़्तार  बहुत है I
तेरे बिछुड़ने की जुदाई सताती है हर वक्त I
ऐसा लगता है मुझे तुमसे प्यार बहुत है I
                                                v.p.singh