Wednesday, August 2, 2017

--:पत्थर है तेरे बोल:--





पत्थर हुए है बोल नज़ाकत चली गई I
मिलने को तो मिल रहे है मोहब्बत चली गई I
सीने में अपने आप ही घुटने लगा है दम,
दिल रहा गया है दर्द कि लज्जत चली गई I
तुम मुझको देखते हो तुम्हे देखता हूं मै,
पहचान है तो क्या हुआ चाहत चली गई I
दोस्त अपने आप ये दुनिया को क्या हुआ,

लगता है जैसे आकर क़यामत चली गई I
उम्मीद थी हमको जो आप ने किया,
खुशिया आकर दर से वापिस चली गई I
लगता हैविम” तेरा जनाजा उठेगा  अब,
लोगो कि भीड़ आकर दर से वापिस चली गई I

                                                 V.P.Singh
                                                 Mob.99 71 22 40 23













Tuesday, August 1, 2017

----:चार मुक्तक:----

                            -:चार मुक्तक:-
      मैंने हर हार को जीत समझा I
      धूप की तपन को शीत समझा II
      हार से क्यों मायूस होऊ,
      हार को जीवन का गीत समझा II
बेदर्द जमाने का बहुत ख्याल हुआ I
यहाँ खुला मोहब्बत का बाज़ार हुआ II
क्यों जमा खर्च में लगे रहते है लोग,
जीवन हुआ गणित का सवाल हुआII
कांच सा मन तोड़ गया कोई I
किरचों को यहाँ छोड़ गया कोई II
आखिर में बहला फुसला कर मुझे,
अनाम रिश्तो से जोड़ गया कोई II
जिन्दगी बेनाम रिश्ता हो गई I
दर्द प़ी जग़ का फ़रिश्ता हो गई II  
मुस्कराकर दर्द को धोखा दिया,
पीर मन की सु कविता हो गईII
शेर:- कहानी तुमने कैसी की, कहां से फिर कहा ठहरी I
       शुरु मेरा एक आंसू था, अंत की  आह  तेरी थी II                                         
                                                                                    वी.पी.सिंह

-----:धूल का फूल:---

इस कविता के माध्यम से एक सच्चे प्रेमी ने दुनिया को आपने एकांत एवं गमगीन रहने के राज को इस तरह व्यक्त किया है I वी.पी.सिंह  
                  ------:धूल का फूल:----
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मै फूल ऐसा हू,जिसे जग भूल न जाये I  
याद में आसू  भला , क्यों  कर  बहाये II   
ऐ धूल कण मेरी कहानी क्या सुनोगे I
बहुत घबरा कर अपना सिर धूनोगे  II
इस लिए हे मन जाओ तुम हठीले ,    
मृत्यु का ताना भला कब तक बुनोगे II
किन्तु ठहरो मत झुकाओ नजरे अपनी I
लो सुनो अब किस तरह हम शूल जाये II 

मै खिला था बाग में खुशिया मिली थी I
बहुत सी कलिया मेरे संग में खिली थी II
रूप आया था मेरे तन पर अनोखा       I
आंख दुनिया की मेरे संग में चली थी  II
गर्भ से मै यो फिरता द्रष्टि अपनी  ,    
ज्यो बिना आधार कोई झूल जाये        II

बहुत आशाए लिए मै जी रहा था       I
आन कर भवरा मेरा रस पी रहा था   II
तितलिया आती अनेको पास मेरे ,
रंग-बिरंगे स्वप्न मानों सी रहा था     II
किन्तु अपने भाग्य की किस को पता है I
कब न जाने भाग्य तर टूट जाये  II

एक बच्चे ने मेरी गर्दन दबा दी I
डाल के आधार की आशा मिटा दी  II
तोड़ कर लाया बगीचे से मुझे वो ,
धूल में फैका मेरी हस्ती मिटा दी II
भूलना चाहा बहुत पिछले दिवस को,
बहुत कोशिश की मगर न भूल पाये II 
मै फूल ऐसा हू,जिसे जग भूल न जाये I
याद में आसू  भला, क्यों  कर  बहाये II   

                                                               वी.पी.सिंह

-: मेरा देश महान:-

-: मेरा देश महान:-
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                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
सुबह सो कर उठे खाट से खबर मिले है भारी
गैर डकैती बलात्कार कर अबला चार मारी
आफिस के एक चपरासी ने घोटाला किया भरी
रेल गाड़ी से बस टकरा गई मर गई बीस सवारी
हा- हाकार मचा चारो ओर है मेरा देश महान II1II
                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II

भाई का दुश्मन भाई है यहाँ ये कैसी नादानी
कही गधे पीते है बीयर कही नहीं है पानी
सन्तरी-मंत्री नेता अफसर कर रहे सब मनमानी
दूध की जगह यह बच्चो को मिलता है अब पानी
चीनी,मिर्च, मसाला, तेल अब नहीं मिले आसान II2II

                                    देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
खालिस्तान की मांग करी पंजाब हो गया खली
बोरोलैंड कभी झारखंड की मांग उठे यहाँ भरी
अगनि,गोली कांड कही पर बम्ब फटे यहाँ भरी
देश की जानती नेताओ ने महगाई  से मारी
हे भारत माँ के देश द्रोही अब अपनी छोड़ो आन II3II
                                                                 देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
जातिवाद कभी आरक्षण पर होती रोज लड़ाई
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों की होती रोज तुडाई
मानवता को छोड़ यहाँ मरते आपस में भाई
गुंडे ओर बेईमान यहाँ करते है खूब कमाई
गरीब,शरीफ ,कमजोर आदमी कहलाता बेईमान II4II
                         देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II
जनसँख्या और बेरोजगारी रोजाना बढ़ जाती
पिलैग,पोलिओ, ड्राप्सी, एड्स की बीमारी यहाँ पाती
सरकार देश की जनता को करके घोटाले खाती 
भूकंप,अंधी,बाढ़ यहाँ हर वर्ष तबहा कर जाती
आज यहाँ पर सस्ती मिलती है लोगो की जान II5II  
                        देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II

आतंकवाद हर जगह यहाँ रोजाना बढता जाता
निर्दोषों को गोली से सरेआम उड़ाया जाता
भारत में अब औरत को सरेआम जलाया जाता
रिश्वत लेकर दोषी को सरेआम बचाया जाता
वी. पी.सिंह कहें भाईओ तुम क्यों बने हुए नादान II6II 

देश हमारा सबसे न्यारा प्यारा हिंदुस्तान I
रिश्वत लूट, डकैती हो रही फिर भी देश महान II


                                                            वी.पी. सिंह